वृक्ष संरक्षणम् कविता

 कवि : विनोद यादव


वृक्ष संरक्षणम् कविता Image credit - Vecteezy.com

{ मृदा उपजाऊ बनाने हेतु }

वृक्षोपजी धरा पे, जड़ धंसा दसो जाल। 
रसोरोहण पोषकों को, धरी ऊपरी डाल॥


{ अपक्षय-अपरदन रोकने हेतु }

अपक्षयी व अपरदन से, मिट्टी होती हास।
वृक्षों को रोपाकरें, करें इनका विकास॥


{ भूजल संग्रहण करने हेतु }

भूजल नित् उपयोग से, जल संकट घड़ी आइ। 
जलसंग्रह वृक्षरोप कर, कर भूजल भरपाइ॥

{ वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु }

कार्बन जैसी वायु से, वायुमंडल में हास।
वृक्षपौधों को लगाकर, रखो वायु इतिहास ॥


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और भी बहुत कुछ है आगे 
अपडेट करता रहूंगा🚩


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