नारी महत्वम् कविता
महिला दिवस 8 मार्च 2024
कवि : विनोद यादव
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| नारी महत्वम् कविता Image credit - pexels.com |
{ भ्रुण हत्या रोकने के रूप में }
जहाँ नारी तहाॅं तुलसी, तुलसी तहां पावनि।
कोटि देवी संपूज हमारी, कोख में क्यों गवानि॥
{ दहेज को रोकने के रूप में }
दानव समाना दहेज, होती छोरी हास।
समय परत है सबको, सबका होत इतिहास ॥
{ जीवन के आधार के रूप में }
नारी जग उजैयारी, पुरुषन का संगवारी।
जड़ें बिना चेतन नहीं, जैसे रूप बिन न्यारी ॥
{ दो परिवारों के बंधन के रूप में }
मैं जग की आधार हूँ, बस पिता की फुलवारि।
ससुरांँगन खुशहालि हूँ, अर्धांगन कि कुंवारि॥
{ जीव को स्वरूप देने के रूप में }
पालनहारी है पिता, पिता तुल्य ना देव।
माता जीवे स्वरूपनी, ममतामयी है देव॥
{ माॅं ममता के रूप में }
भाव ऐसा कैसा है, जो मैंने है पाय।
मन की थाह जल से माॅं, माॅं तूने नहलाय॥
{ वृद्धाश्रम विरोध के रूप में }
चार पहर चौबीस घड़ी, रहूंँ मैं शीतल छांव।
पांव बढ़ा न छांव घटा, छांव छोड़ कहं आंव॥
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आगे अपडेट करता जाऊंगा 🚩

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