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Showing posts from March, 2024

ज्ञान महत्वम् कविता

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 कवि : विनोद यादव ज्ञान महत्वम् कविता Image credit - Vecteezy.com { प्रथम चार गुरू कौन होते हैं }   प्रथमा गुरु मातु पिता, द्वितीया गुरु जाप। तृतीय गुरु काल है, चौथा गुरु आप॥ { ज्ञान हमें प्रकाशित करता है }  ज्ञान ऐसा होवे है, नाहिं अंधेरे भोर।  ज्ञानी होवे ज्ञान से, प्रकाशित चहूंँ ओर॥ { वेद सार गायत्री मंत्र के रूप में }  फूले का सार मधुरस, दूध सार घीयास।  वेद सार गायत्री मंत्र, कहते महर्षि व्यास॥ { विद्यार्थी के 5 गुणों के रूप में }  ध्यान बगु स्वाने शनये, भोजने अल्पहारि। काक चेष्टा गुरु नमे, सदैव पाठनकारि॥ { बिना अनुभव के ज्ञान ना बांटे }    जीवन में नहिं अनुभूति, कहे न सिद्ध विचार। समय होत ऊलट फेर, परे परीक्षा पछार॥ { स्वार्थपूर्ण कर्मो (अकर्म) से बचें }  मानुष तन अनमोल रे, करो न भोग विलाज। उसकी दी इसी तनका, करो सत्कर्म आज॥ { हरि गुण आचरण में लाना भक्ति है}   भजत भजत पत्थर भजे, भजे पत्थर गुन नाहिं।  सुमिरे जो गोविंद गुने, पागल पिंयांरि ओहिं॥   Share Please!  और भी बहुत कुछ है आगे  अपडेट करता रहूंगा🚩

वृक्ष संरक्षणम् कविता

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 कवि : विनोद यादव वृक्ष संरक्षणम् कविता Image credit - Vecteezy.com { मृदा उपजाऊ बनाने हेतु } वृक्षोपजी धरा पे, जड़ धंसा दसो जाल।  रसोरोहण पोषकों को, धरी ऊपरी डाल॥ { अपक्षय-अपरदन रोकने हेतु } अपक्षयी व अपरदन से, मिट्टी होती हास। वृक्षों को रोपाकरें, करें इनका विकास॥ { भूजल संग्रहण करने हेतु } भूजल नित् उपयोग से, जल संकट घड़ी आइ।  जलसंग्रह वृक्षरोप कर, कर भूजल भरपाइ॥ { वायु प्रदूषण नियंत्रण हेतु } कार्बन जैसी वायु से, वायुमंडल में हास। वृक्षपौधों को लगाकर, रखो वायु इतिहास ॥ Share Please!  और भी बहुत कुछ है आगे  अपडेट करता रहूंगा🚩

मिट्टी संरक्षणम् कविता

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 कवि : विनोद यादव मिट्टी संरक्षणम् कविता Image credit - Vecteezy.com { अपक्षय-अपरदन रोकने के हेतु } अपक्षयी व अपरदन से, मिट्टी होती हास। वृक्षों को रोपाकरें, करें इनका विकास॥ { रासायनिक प्रदूषण रोकने हेतु } खेत मिट्टी में उपजी, हर किसान की धान।  जैविक खाद अपनाओ, आओ देखो शान॥ Share Please!  और भी बहुत कुछ है आगे  अपडेट करता रहूंगा🚩

वायु संरक्षणम् कविता

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कवि : विनोद यादव  वायु संरक्षणम् Image credit by Vecteezy.com { प्राण वायु के रूप में }   नभमंडल में है बहती, है वीर शुद्ध वायु।  प्राणवायु देकर हमें, बढ़ाय हमारे आयु॥ { प्रदूषण नियंत्रण के रूप में }  कार्बन जैसी वायु से, वायुमंडल में हास।  वृक्षपौधों को लगाकर, रखो वायु इतिहास॥ Share Please!  और भी बहुत कुछ है आगे  अपडेट करता रहूंगा🚩

जल संरक्षणम् कविता

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 कवि : विनोद यादव जल संरक्षणम् Image credit by Vecteezy.com { जीवन के रूप में }  जल जीवन का जड़ रे, जीव जीवनी रूप।  जैसे खून लगी तन को, तैसे जल का रूप॥ { जलस्रोत के रूप में }  जल का स्रोत है अनेक, पिय जल नीच आकार।  स्रोत दूषित हो ना पाय, इसे करो सत्कार॥ { भूजल के रूप में }  भूजल नित् उपयोग से, जल संकट घड़ी आइ।  जलसंग्रह वृक्षरोप कर, कर भूजल भरपाइ॥ Share Please!  और भी बहुत कुछ है आगे  अपडेट करता रहूंगा🚩

नारी महत्वम् कविता

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महिला दिवस 8 मार्च 2024  कवि :  विनोद यादव   नारी महत्वम् कविता Image credit - pexels.com { भ्रु ण हत्या रोकने के रूप में }   जहाँ नारी तहाॅं तुलसी,  तुलसी तहां पावनि।  कोटि देवी संपूज हमारी,  कोख में क्यों गवानि॥ { दहेज को रोकने के रूप में }  दानव समाना दहेज,  होती छोरी हास।  समय परत है सबको,  सबका होत इतिहास ॥ { जीवन के आधार के रूप में }  नारी जग उजैयारी,  पुरुषन का संगवारी।  जड़ें बिना चेतन नहीं,  जैसे रूप बिन न्यारी ॥ { दो परिवारों के बंधन के रूप में }  मैं जग की आधार हूँ,  बस पिता की फुलवारि।  ससुरांँगन खुशहालि हूँ,  अर्धांगन कि कुंवारि॥ { जीव को स्वरूप देने के रूप में }  पालनहारी है पिता, पिता तुल्य ना देव। माता जीवे स्वरूपनी, ममतामयी है देव॥ { माॅं ममता के रूप में } भाव ऐसा कैसा है, जो मैंने है पाय। मन की थाह जल से माॅं, माॅं तूने नहलाय॥ { वृद्धाश्रम विरोध के रूप में }  चार पहर चौबीस घड़ी, रहूंँ मैं शीतल छांव।  पांव बढ़ा न छांव घटा, छांव छोड़ कहं आंव॥ Share Please!  ...