बीजेपी के दोहे - कविता

 कवि : विनोद यादव 

बीजेपी के दोहे Image credit - Vecteezy.com 


भाजपा का यह कर्म है, विकसित भारत ओर। 

ऐसी सुबह लायेंगे, जहं शीतल चहूं ओर॥


रे साथी... जहं शीतल चहूं ओर॥


मैं परिवार मोदी का, मोदी मेरे पास।

आवासों में घर मिले ,मिले आरोग्य श्वांस॥


सबका साथ विश्वास है, सबका है विकास। 

मोदी की गारंटी है, विकसित भारत पास॥ 


अन्नपूर्णों की पांचो, तृतीया की आस। 

अबकि बार शतक चारों, श्रीविजय मोदी दास॥


दशक पहले भोर हुआ, हुआ जगाने आप। 

भाजपा नयी भारते, निर्भीक और प्रताप॥


पंचप्रण अमृतकाल की, भाव एकै समान। 

एक श्रेष्ठ भारत की, संकल्प है तू जान॥


लगन ऐसा काम का, नाम पद का प्रधान।

भारत भाग्य विधाता, मोदी को तू जान॥


अंत्योदय तक पहुंच बना, बना डोर जन खींच। 

आरोग्यावास जन को, जल राशन से सींच॥


द्वार दशरथ नंद कौशिल्या, से वचन है निभाइ। 

भाजपा की दृढ़ प्रतिज्ञा, से राम हमने पाइ॥


थी संकल्प राष्ट्र से, राष्ट्र एक विधान। 

कश्मीर से श्रीशाह ने, तोड़ दिए दो विधान॥


देशप्रेम की भाव ऐसी, जैसे गरजे सींह।

जो छेड़ेगा नहीं छोड़ेंगे, कहे राजनाथ सींह॥


वाहनपथ सुगम बने, सुगम राह पट खोल। 

श्रीनितिन की नीति पडे़, पडे़ प्रगति की मोल॥


कूटनीति की विधा में, चाणक्य से अधिमान। 

राष्ट्र पंद्रा भारत को, दिए सर्वोच्च सम्मान॥


नीति बने लागू हुए, मिले संपूर्ण आकार। 

भ्रष्टाचार से मुक्त है, भाजपा की सरकार॥


कौन यह सोचा होगा, होगा नारी सम्मान। 

गैस चूल्हा नलजल तक, भाजपा रखे ध्यान॥


शक्ति की शक्ति में हुआ, हुआ शक्ति का संचार।

भाग तैंतीस नारी का, रखी संसद में धार॥


राजनीति से राज नहीं, नहीं नीति से राज। 

भाजपा की नीति रही, नीति राष्ट्र की काज॥



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