जल संरक्षणम् कविता
कवि : विनोद यादव
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{ जीवन के रूप में }
जल जीवन का जड़ रे, जीव जीवनी रूप।
जैसे खून लगी तन को, तैसे जल का रूप॥
{ जलस्रोत के रूप में }
जल का स्रोत है अनेक, पिय जल नीच आकार।
स्रोत दूषित हो ना पाय, इसे करो सत्कार॥
{ भूजल के रूप में }
भूजल नित् उपयोग से, जल संकट घड़ी आइ।
जलसंग्रह वृक्षरोप कर, कर भूजल भरपाइ॥
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और भी बहुत कुछ है आगे
अपडेट करता रहूंगा🚩

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